मिडिल ईस्ट संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, ब्रेंट क्रूड ऑयल $108 के पार
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दुबई/लंदन: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी भूचाल आ गया है। वैश्विक व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सैन्य गतिविधियों और बढ़ते तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $108 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो पिछले कई महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। सैन्य और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर दो प्रमुख शक्तियों के बीच गतिरोध बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री मार्ग से दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार के अवरोध या सैन्य टकराव की आशंका मात्र से ही सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) ठप होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है। कच्चे तेल की कीमतों में इस अचानक उछाल से अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें $100 के ऊपर लंबे समय तक टिकी रहीं, तो दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) एक बार फिर नियंत्रण से बाहर हो सकती है। केंद्रीय बैंकों को महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला टालना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा। अपनी तेल जरूरतों का 85 फीसदी से अधिक आयात करने वाले भारत के लिए यह संकट दोहरी मार साबित हो सकता है। कच्चे तेल के $108 के पार जाने से भारत का व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा (CAD) तेजी से बढ़ेगा। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि खाड़ी देशों में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में भारतीय तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का सीधा बोझ पड़ेगा।